DEVGIRI FORT
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DEVGIRI FORT | देवगिरि किल्ला के बारे में जानकारी

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नमस्कार दोस्तों, हम II TECHNOLOGY आपके लिए एक नयी जानकारी लेकर आये हैं जो DEVGIRI FORT के बारे में हैं।

दोस्तों भारत एक ऐसा देश हैं जहा पर आपको पुराणी इमारते, प्राचीन किल्ले और प्राचीन संस्कृति देखि जा सकती हैं।

भारत एक समृद्ध देश था और तब भारत के किल्ले अन्य देशो के मुकाबले बहोत अच्छे हुआ करते थे।

दोस्तों पुराने ज़माने में FORT यानि किल्ला राजा महाराजाओ के लिए एक राजमहल जैसा हुआ करता था।

हमारे इंडिया में कई ऐसे राजा महाराजा गुज़रे हैं जिन्होंने बहोत ही शानदार तरीके से किल्ले बनाये हैं।

आपको सायद पता नहीं होगा लेकिन हमारे इंडिया में १००० से भी ज्यादा किल्ले मौजूद हैं।

इन्ही १००० किल्ले में से १ किल्ला हैं वो हैं DEVGIRI FORT।

DEVGIRI FORT

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ये किल्ला अपनी बनावट के कारन बहोत ही प्रसिद्द हैं।

ये किल्ला महाराष्ट्र के औरंगाबाद सिटी के दौलताबाद एरिया में स्थित हैं।

DEVGIRI FORT का इतिहास

आज से करीब ४०० से ५०० नहीं बल्कि ९०० साल पेहले का ये इतिहास हैं।

ये बात हैं ११वी सदी की जब भारत के पश्चिम इलाके में यादव सल्तनत के लोगो का राज़ चलता था।

यादव सल्तनत के लोगो ने पश्चिमी इलाके में अपना मैं बेस और कैपिटल सिटी बनाया था।

११८७ में यादव सल्तनत के राजा भिल्लमा ने अपने डिफेन्स और सल्तनत के लिए एक किल्ले का निर्माण किया।

एक पहाड़ को काटकर त्रिकोणीय किल्ला बना दिया गया।

जो की आने वाले दुश्मनो से प्रोटेक्शन दे सके।

उसके बाद इस किल्ले को नाम दिया गया DEVGIRI FORT।

देवगिरि नाम देने का मकसद ये था की पहले के लोग ये बिलीव करते थे की जिस पहाड़ पर ये किल्ला बनाया गया हैं वहाँ हिन्दू धर्म के भगवान शिवजी रहा करते थे।

इसलिए इस किल्ले को हिल्स ऑफ़ गॉड भी कहा जाता हैं।

ऊटी हिल स्टेशन के बारे में जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे।

देवगिरि किल्ले पे कब्ज़ा

१३२८ में दिल्ली के सुल्तान ने DEVGIRI FORT को देखा और वहाँ पर कब्ज़ा कर लिया।

उसके बाद सुल्तान ने अपनी पूरी सल्तनत को देवगिरि में शिफ्ट कर दिया।

उसके बाद सुल्तान ने देवगिरि का नाम बदल के दौलताबाद कर दिया।

लेकिन तुलगत सल्तनत के लोग ज्यादा दिन दौलताबाद शहर में नहीं रहे।

ज्यादा पानी की कमी होने की वजह से और सूखेपन की वजह से सुलन मुहमद बिन तुगलन ने अपना कैपिटल वापिस दिल्ली शिफ्ट करने का निर्णय लिया।

इन्हीके इस निर्णय को लेकर तुगलत सल्तनत के कुछ लोग नाखुश थे और उन्ही में से एक अलउद्दीन हसन बहमनी शाह था।

जिसको मुहमद बिन तुगलन का निर्णय ठीक नहीं लगा।

उसके बाद १३४७ में इन्होने तुगलत सल्तनत को छोड़ दिया और अपनी खुद की बहमनी सल्तनत की शुरुआत की।

फिर DEVGIRI FORT को बहमनी सल्तनत ने कब्ज़े में ले लिया।

देवगिरि किल्ले को अपने कण्ट्रोल में लेने के बाद हसन बहमनी शाह ने किल्ले में एक ऊँचे मीनार का निर्माण किया।

जिसको चाँद मीनार भी कहा जाता हैं जो की दिल्ली के क़ुतुब मीनार से मिलता जुलता है।

बहमनी शाह ने ये मीनार इसलिए बनाया था ताकि आने वाले लोगो को ये लग सके की ये किल्ला बहमनी सल्तनत का हैं।

DEVGIRI FORT
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बहमनी सल्तनत के बाद ये किल्ला अहमद नगर के निज़ाम के कब्ज़े में आ गया था।

अहमदनगर के सुल्तान मलिक अम्बर ने इस शहर को अपने कब्ज़े में लिया।

जिसका नाम खड़की रखा था। जिसमे दौलताबाद एरिया और देवगिरि के इलाके दोनों ही इनके कब्ज़े में आ गए थे।

लेकिन १६३५ में देवगिरि किल्ला और पूरा खड़की शहर मुघलो के कब्ज़े में आ गया था।

तो दोस्तों ये किल्ला कुछ इसी तरह कई सल्तनत के कब्ज़े में आया और गया और अपने सल्तनत के लोगो ने अपने अपने दौर में इस किल्ले में बदलाव किये हैं।

आज के वक़्त में जो किल्ला देखने मिलता हैं वो सब सल्तनत के अपने अपने बनाये हुए चीज़ो का मिश्रण हैं।

जैसे की

VIP PRISON – जो की बादशाह औरंगज़ेब ने मुघलो के दौर में बनाया था।
चाँद मीनार – ये हसन बहमनी शाह ने अपने दौर में बनाया था।
नकली दरवाजे – यहाँ पर काफी सारे नकली दरवाजे बनाये गए हैं और इस किल्ले का प्रवेशद्वार और बहार निकलने द्वार एक ही द्वार से होता हैं।

ये सब इसीलिए किया गया हैं ताकि पुराने ज़माने में दुश्मनो को किल्ले में घुसने से रोका जा सके।

ये पूरा किल्ला एक नदी से घिरा हुआ हैं।

कहा जाता हैं की इस नदी में पुराने ज़माने में मगरमच्छ को रखा जाता था ताकि ये पुरे किल्ले की रक्षा कर सके।

जैसा की एक कछुए के ऊपर का हिस्सा हार्ड होता हैं वैसे ही इस किल्ले को आजु बाजु से संरक्षित किया गया हैं।

ताकि कोई दुश्मन इस किल्ले में घुस न सके।

इसलिए इतनी अच्छी डिफेन्स सिस्टम की वजह से इस DEVGIRI FORT को महाराष्ट्र की सात अजायबी में भी शामिल किया गया हैं।

इसका सबसे ज्यादा श्रेय यादव सल्तनत के राजा भिल्लमा को जाता हैं।

 देवगिरि किल्ले तक जाने के रस्ते

१) रोड के माध्यम से :-

अगर आप अपना पर्सनल व्हीकल लेकर जा रहे हो तो आप आसानी से यहाँ पर सड़क मार्ग से जा सकते हो।

अगर आपके पास आपका पर्सनल व्हीकल नहीं हैं तो आप टैक्सी से ये फिर औरंगाबाद से एलोरा जाने वाली बस में सफर करके जा सकते हैं।

२) वायु के माध्यम से :-

आप किसी भी एयरपोर्ट से औरंगाबाद एयरपोर्ट तक वायुमार्ग से आ सकते हैं।

३) रेल के माध्यम से :-

आप किसी भी शहर से औरंगाबाद जाने वाली ट्रैन में बैठकर रेल माध्यम से देवगिरि जा सकते हैं।

देवगिरि किल्ले तक जाने के रस्ते

१) रोड के माध्यम से :-

अगर आप अपना पर्सनल व्हीकल लेकर जा रहे हो तो आप आसानी से यहाँ पर सड़क मार्ग से जा सकते हो।

अगर आपके पास आपका पर्सनल व्हीकल नहीं हैं तो आप टैक्सी से ये फिर औरंगाबाद से एलोरा जाने वाली बस में सफर करके जा सकते हैं।

२) वायु के माध्यम से :-

आप किसी भी एयरपोर्ट से औरंगाबाद एयरपोर्ट तक वायुमार्ग से आ सकते हैं।

३) रेल के माध्यम से :-

आप किसी भी शहर से औरंगाबाद जाने वाली ट्रैन में बैठकर रेल माध्यम से देवगिरि जा सकते हैं।

फाइनल वर्ड्स

तो दोस्तों ये जानकारी थी DEVGIRI FORT के बारे में जिसमे हमने आपको देवगिरि किल्ले के इतिहास के बारे में और ये किल्ला कैसे बना था उनके बारे में जानकारी दी हैं।

उसके बाद अगर आप देवगिरि किल्ला जाना चाहते हो वो कोनसे माध्यम से जा सकते हो उसके बारे में भी हमने आपको जानकारी दी हैं।

अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगी हो तो कृपया कमेंट करके अपनी राय जरूर दे।

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